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सितंबर 28, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैंने ख़ुद को वक़्त के हवाले कर दिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैंने ज़माने से हर रिश्ता तोड़ लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैंने ग़म में भी मुस्कुराना सीख लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैं तुझ पर मरना छोड़ चुकी हूँ, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैंने दुखों से सौदा कर लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मोहब्बत में मरकर जी लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा