"तेरा यूँ ही चले जाना..."



           तेरा यूँ ही चले जाना,

मुझे भीतर तक अशांत कर गया है।


नियति प्रबल है — जानती हूँ,

मृत्यु ही अंतिम सत्य है — मानती हूँ,

पर मन…

मन नहीं मानता इन बातों को।


हर क्षण तुम्हें ढूँढता है,

हर सांस तुम्हारे होने की आस लगाता है।


चेतना सवाल करती है —

यूँ बिना कहे कोई जाता है भला?

इतनी दूर,

जहाँ से कोई लौटकर नहीं आता...😔

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