दास्तां -ए - दिल की
कुछ दस्ता- ए- दिल की अनकही हैं
होठो पे हँसी आँखो में नमी हैं
यादों के पहलू कहो कैसे मैं कह लू
बातें जमाने की कहो कैसे मैं सह लू
शिकवे शिकायत किससे कहु मैं
दर्द ए मुहब्बत को कैसे सहु मैं
तु करम कर मेरे दिल का मशीहा
“दर्द-ए-दिल” एक ऐसा ब्लॉग है जहाँ दिल की भावनाएँ, अनकहे जज़्बात और जीवन की संवेदनाएँ शब्दों में बयां की जाती हैं। यहाँ आपको कविताएँ, शायरी, और लघु रचनाएँ मिलेंगी, जो प्रेम, तन्हाई, उम्मीद और जिंदगी की झलक दिखाती हैं। हर पोस्ट आपके दिल को छूने और सोचने पर मजबूर करने वाली होती है।
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