दास्तां -ए - दिल की

कुछ दस्ता- ए- दिल की  अनकही हैं

होठो पे हँसी आँखो में नमी हैं
यादों के पहलू कहो कैसे मैं कह लू 
बातें जमाने की कहो कैसे मैं सह लू
शिकवे शिकायत किससे कहु मैं
दर्द ए मुहब्बत को कैसे सहु मैं 
तु करम कर मेरे दिल का मशीहा 


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