शायरी

@ तलब- ए- इश्क की जाती नहीं

मिल जाए कोई तुम -सा तो बात बने@@


 @तू देख तो सही हम अभी भी

तेरे पाने की भ्रम में खुद को

किस तरह भुलाये बैठे हैं@@


@तु जा तेरा याद ही काफी हैं

तेरी हर गुनाह के लिए मेरी

  • बेपनाह मुहब्बत ही काफी हैं@@


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