शायरी

@जिन्दगी जब तक है जिया जाए।

 यूं इलजाम कब तक किसी को दिया जाए।। 
शराफत का जमाना न रहा मेरे दोस्त। 
मुहब्बत में यूं कब तक धोखा खाया जाए ।।@@

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@न कोई अपील होगा। 
न कोई दलील होगा।।
मसला इश्क हैं फैसला जो भी होगा। 
बस दिल से कबूल होगा।। @@
 

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