जल की खोज

यूं तो जल की खोज तो जीवन से पहले ही हो गई थीl ऐसा माना जाता है की पृथ्वी पर जीवन की उत्पति जल में ही हुई है। " जल ही जीवन है।" ऐसे लगता हैं ये बात शायद इसलिए कही गई हैं की जीवन या जीव की उत्पति सबसे पहले जल में हुई थी ।अब बात यह है कि जब जीवन की शुरुआत ही जल से हो रही है तो यहां किस जल की खोज की बात हो रही है। कही जल की उस संरचना की बात तो नहीं तो रही हैं जिसकी खोज 1731-1810 में हेनरी कनेवेंडिश ने की थी। हम जिस पृथ्वी पर रह रहे है उसके 71.27 प्रतिशत भाग पर जल ही जल है तो भी ऐसे पानी से लबालब पृथ्वी पर आखिर किस जल की खोज की बात की जा रही हैं? यूं तो सावन का महीना वर्षा ऋतु का ऐसा महीना है जिसमें शायद ही ऐसा कोई दिन हो जिस दिन बारिश न होती हो। पर इस बार जो मानो सावन को किसी की नजर लग गई हो। जब से होश संभाला मैंने सावन का ये रूप पहले कभी न देखी थी। इस बार का सावन जेठ से भी ज्यादा दुखदाई हो गई। जिस सावन में लोग भींगते हुए चाय की चुस्की लेते नजर आते थे। आज उस महीने में लोग गर्मी से कोल ड्रिंक पीने को मजबूर हैं। हा मगर एक बात तो समान है लोग इससे पहले भी सावन में छाता लेकर निकलते थे पर हर बार बारिश में न भींगे इसलिए छाता लेकर कर निकलते थे और इस बार सावन के इस भीषण गर्मी में धूप से बचने के लिए छाता लेकर निकलते हैं। लगभग पूरा बिहार सुखाड़ के चपेट में आ गया है इस बार। कई जगहों पर चापाकाल भी सुख गई है। ऐसे में लोगो को पीने को पानी प्राप्त करने के लिए काफी मशक्कत करनी पर रही हैं। ऐसा नहीं है की बिहार पहली बार सुखाड़ जैसे प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा हैं। बिहार लगभग हर साल कभी बाढ़ और कभी सुखाड़ से गुजरता हैं। यहां की सरकार ने भी काफी इंतजाम किया है इस से निपटने के लिए। जिस बिहार के 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर हैं वैसे राज्य में सुखाड़ और बाढ़ जैसे समस्याओं के लिए बस फसल का मुआवजा दे कर जनता पर एहसान कर देना कितना सही हैं? बिहार के लोग इस स्थित में हैं की उन्हें जल की तलाश करनी पर रही है पीने के लिए और जीने के लिए अन्न उपजाने के लिए।

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