घास के उत्साह
मुझे काट पाओइतनी हिम्मत कहां तुझमेंतुम काटोगे मुझे अपनी पौनी हशिए की धार सेमैं फिर उग आऊंगी दो गुनी रफ्तार सेअवरुद्ध न कर पाओगे मुझेनिराश हो कर फिर लौटजाओगे तुम अपने आवास पे मुझे दर नहीं हैं कि तुमफिर आओगे कल सूर्य की प्रकाश मेंकाटोगे फिर से मुझे अपने हसिए की तेज धार सेउगूंगी फिर भी मैं अपने दो गुने उत्साह सेहे मानव! सीखो तुम भीइस घास के उत्साह से।



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