खामोश दिल की दास्तां
जब मैं ओढ़ लु चादर खामोशियों कि
क्या तुम मुस्कान बनकर मेरे अधरों पर आओगे
तुझे पाने के सफर में ही मैंने खुद को खोई हूं
क्या तुम हमसफर बन कर ताउम्र मेरा साथ निभाओगे
जमाने ने हर बार बुरा कहा है मुझे
क्या तुम मेरी अच्छाइयो से इन्हें इन परिचय करवाओगे.
जब जगे मुझमें मुझसे मिलने की आस
क्या तुम मुझे मेरी दुनिया में मुझे वापस लेकर जाओगे
मुझ से पर साया हैं नाकामयाबियों की शायद
क्या तुम मेरी जीवन में कामयाबियों के धूप खिलाओगे
उम्मीद -ए-वफा की छोड़ दी है हमने जमाने से
क्या तुम भी मुझपे बेवफाई का इल्जाम लगाओगे
अब कुछ विशेष नहीं है जीवन मे क्या
तुम मेरे शेष जीवन में विशेष बनकर मेरा साथ निभाओगे🖤



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