खुद को आजमाना हैं
गम में मैंने मुकुराना सीखा है
बेगानो को भी अपना बनाना सीखा हैं
लोग कहते है की हम मुस्कुराते बहुत है
उन्हें क्या पता हमने लबों पे दर्द सजाना सीखा है
गुजरे कल से क्या शिकायत करे हम
आने वाले पलों को अपनाना हैं सीखा है
शिकायत तो खुद से है मुझे
गम देने वाला तो बेगाना हैं
हर चेहरे के पीछे हजारों चेहरे छुपे हैं यहां
हमें तो अब बस खुद को आजमाना हैं।
एक अरसा बीत गया खुद को मानने में
लोग कहते हैं जालिम ये ज़माना हैं।



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