समय के पन्नों पर
मानव हूं मानवता का एहसास लिखती हूं
समय के पन्नो पे कल का इतिहास लिखती हूं
बीत रहा है आज, कल के इंतज़ार में
बीतें हर पल का हिसाब लिखती हूं
समय के पन्नों पर कल का इतिहास लिखती हूं
कुछ जुल्म किए कुछ जुल्म सहे
हर जुल्म का अंजाम लिखती हूं
सत्य की स्याही से बातें तमाम लिखती हूं
हमसे है ये ज़माना, जमाने से हम नहीं
शब्द के अंगारे मैं हर बार लिखती हूं
समय के पन्नों पर कल का इतिहास लिखती हूं🤔



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