अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा सुनिश्चित करें

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे मौलिक अधिकारों में से एक है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत लिखित और मौखिक रूप से अपना मत प्रकट करने हेतु अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रावधान किया गया है।


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग करते हुए हम अपनी विचारों को लिखित मौखिक रूप से व्यक्त कर सकते हैं। पर हम जानते हैं कि हर अधिकार के साथ कुछ कर्तव्य भी जुड़े होते हैं, जिसका ध्यान रखना भी अति आवश्यक होता है। इन कर्तव्य को जाने वगैर अधिकारों का प्रयोग कभी-कभी नुकसानदेह होता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े हुए कर्तव्य यह कहता है, कि आप बेशक अपना विचार प्रकट कीजिए पर आपके किसी विचार से देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता पर इसका प्रतिकूल असर ना पड़े। न्यायालय की अवमानना एवं वैदेशिक संबंधों पर प्रतिकूल असर ना पड़े।


 लोग वाक की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करके कुछ ऐसे शब्द बोल जाते हैं जिससे वे खुद अपने मौलिक कर्तव्यों का हनन कर बैठते हैं। अपने विचारों का प्रचार करना हमारा अधिकार हैं पर अपनी विचारों से किसी जाति, धर्म, समुदाय या किसी व्यक्ति विशेष के प्रतिष्ठा को ठेस अनुचित है, ऐसा करने पर हमारे संविधान में सजा का भी प्रावधान हैं। 


सोशल मीडिया के इस दौर में अपनी अभिवक्ति को आसानी से फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम, स्नैपचैट के लोग उजागर करते हैं। और आजकल सोशल मीडिया के जरिए लोग अपने धर्म, जाति, समुदाय के प्रचार के लिए दुसरे धर्म, जाति और समुदाय के लोगो पर अवांछित टिप्पणी करते हैं। ऐसी टिप्पणी कभी - कभी हिंसा का रूप ले लेती हैं। जो की आमजन के लिए घातक सिद्ध होती हैं।
  
ये बात अलग है कि आज के दौर में कुछ लोग अपना व्यक्तिगत प्रचार के लिए इस तरह के बयानबाजी करते हैं जिससे किसी के प्रतिष्ठा का हनन होता हैं। वैसे लोगों को अपना वैधानिक कर्तव्य का निर्वाहन करते हुएं अपने विचार को प्रस्तुत करना चहिए।

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