बीत गई सो बात गई.....🥰
हरिवंश राय बच्चन जी की कविता "बीत गई सो बात गई"इस कविता के माध्यम से उन्होंने बड़ा ही प्यारा संदेश दिया है। जीवन की सच्चाइयों को उन्होंने बहुत ही सरल भाषा में किस कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं यह प्रकृति परिवर्तनशील है यहां कुछ भी अस्थाई नहीं है। कहा भी जाता है कि "परिवर्तन ही प्रकृति का नियम" है। उदाहरण के लिए अभी बरसात है तो कल सर्द का मौसम भी दस्तक देगा। कहने का तात्पर्य है कि इस संसार में कुछ भी स्थाई नहीं है तो फिर इस अस्थाई दुनिया के लिए दुख कैसा? शोक कैसा? यह दुख भी तो अस्थाई है आज दुख है तो कल दुख भी ना रहेगा। कोई सदैव दुखी नहीं रह सकता और कोई सदैव सुखी भी नहीं रह सकता है। यह जीवन की सच्चाई है। जब कुछ भी स्थाई नहीं है तो हम क्यों बंध जाते हैं इस सुख-दुख के बंधनों से। जरूरी तो नहीं की आज जो हमारे पास है साथ है वह सदैव हमारे साथ और पास ही रहेगा फिर किसी के जाने पर निराशा कैसी?किसी के आने पर खुशी कैसा?
!!!" बीती ते बिसार दे
आगे की सुधि ले"!!!
उपरोक्त बातों के अनुसार उचित यही होगा कि हम रहीम के इन छंदों को आत्मसात करके दृढ़ता से जीवन में आगे की ओर प्रस्थान करें।



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