शायरी


  ढाल चुकी है शाम ये पहर कैसा है# 

 पसरा है सन्नाटा ये शहर कैसा हैं##

आगोश में भरने को बेताब है ये राते#

आने वाली सुबह का ये इंतजार कैसा हैं##

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट