लेखन के सिद्धांत
आज मैं लेखन के उन सिद्धांत के बारे में बात करूंगी जिसको मैंने अपने अध्यन के दौरान जाना है। लेखन की कई विद्याएं हैं - नाटक, कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध, स्तंभ लेख, संस्मरण आदि। लेखन की किसी भी विधा में निपुण होने के कुछ सिद्धांत हैं, जिसको अपनाकर कोई अच्छा लेखक, कवि, उपन्यासकार, स्तंभकार, समीक्षक बन सकता है। लेखन का सिद्धांत कहते हैं।
रचनातम लेखन करने के लिए सबसे जरूरी तत्व है आपका बौद्धिक होना। आपमें बौद्धिक क्षमता का जितना विकास होगा, यकीनन आप उतना ही अच्छा लिख पाएंगे। एक लेखक को संवेदनशील होना अति आवश्यक है , मानवता के प्रति, प्राकृति के प्रति, रिश्तों के प्रति। लेखक जितना ज्यादा संवेदनशील होगा,ये संवेदनशीलता लेखनी में झलकेगी, जो पाठक के दिलों दिमाग को प्रभावित करेगी l
उपरोक्त तो लेखन से पहले की कड़ी हैं। अब आगे कुछ भी लिखने से पहले परंपरागत लेखन का अध्ययन करना फिर सामायिक लेखक की रचना को पढ़ना जरूरी होता हैं। परंपरागत लेखन और समसायिक लेखन पर अध्ययन करने के बाद उसके बीच के खालीपन को भरना ये संपूरक रचना कहलाती हैं।
लेखन के इन सिद्धांतों को खारिज करते हुएं आजकल ट्रेड सेटिंग लेखन काफी प्रचलित हो रही हैं। ट्रेंड सेटिंग लेखन के लिए बौद्धिक होना और तार्किक होना जरूरी हैं। और फिर कल्पना के आधार पर लेखन को रचनात्मक व रोचक बना सकते हैं।





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जवाब देंहटाएंThanku so much
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