सलामती की दुआ

 

 

अपने तहे दिल की बात कह रही हूं
उसकी सलामती की फरियाद कर रही हूं
अगर की उसने गलती तो उसे माफ कर देना
चाहो तो उसकी हर सजा मेरे नाम कर देना
ए रब तू खुश रखना उसे हर हाल में
चाहो तो मुझे रख लेना दुखो के तालाब में
तू उसे मेरी यादों से बचाए रखना
चाहो तो मेरे दिल में उसकी यादों की चिता जलाए रखना
सौंपा मैंने तुझे ही अपना हमदम
तू उसे दुनियां के बुरी नजर से बचाएं रखना
रहम करना तू मुझे पे मसीहा
करम करना तू मुझ पे मसीहा!¡!!!!

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