युवा भारत


किसी देश के विकास में उस देश के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। युवा किसी देश के शक्ति का आधार होता है। वर्तमान में भारत में युवाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। देश के कुल जनसंख्या में युवा 66 %है। ऐसे में भारत युवाओं का देश कहा जा रहा है।
   युवा मानव जीवन की ऐसी अवस्था है, जिसमें ऊर्जा भरपूर होता है। ऊर्जा से लबालब इंसान में अपार संभावनाएं होती है। ऐसे में अगर ऊर्जा का सदुपयोग किया जाए तो हमारा देश विकास की ओर अग्रसर होगा। अगर वही युवा अपने ऊर्जा का नकारात्मक उपयोग करे तो देश का विनाश होते देर नहीं लगेगा। युवाओं की शक्ति को पहचानकर इटली के एकीकरण के नायक जोसेफ मेजनी ने एक बड़ी ही अच्छी बात कही है :-
      " यदि समाज में क्रांति लानी हो तो क्रांति का
           नेतृत्व युवाओं के हाथ में दे दो।"


अब सवाल यह उठता है कि हमारी सरकार इस दिशा में क्या काम कर रही है? हमारा देश युवा शक्ति का कितना उपयोग विकास के लिए कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 25 साल से काम के 42.3 फ़ीसदी युवा ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। यह रिपोर्ट देश के लिए चिंताजनक है। आखिरकार यह शिक्षित बेरोजगार युवा क्या कर रहे हैं?इसका लेखा-जोखा है हमारे सरकार के पास।

तकनीक के इस युग ने बेशक देश को आगे बढ़ाया है पर इसने कई समस्याओं को जन्म दिया है। आज के शिक्षित बेरोजगार युवा इंटरनेट का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। जिसका असर जिसका असर आए दिन देखने को मिलता है। देश के आधे बेरोजगार युवा रील्स बनाने में लगे हैं वही बचे आधे युवा इस बात को लेकर के चिंतित है कि उनका भविष्य कैसा होगा?



हालांकि केंद्र सराकार युवाओं को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं बनाई है और उसपर काम भी किया जा रहा हैं। इन योजनाओं में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना प्रमुख है। इस योजना के तहत युवाओं को उनके रुचि के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है। पर अफसोस इस योजना से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी युवाओं को काम नहीं मिल रहा हैं। यह योजना उतनी सफल नहीं है जितना की होना चाहिए था। 


सरकार को युवाओं को ध्यान में रख कर ऐसे योजनाओं का कार्यान्वयन करना चहिए जिसके की युवा अपने कौशल को पहचान कर आर्थिक रूप से सशक्त हो, तब जाकर सही मायने में ये देश के विकास में अपना योगदान कर पाएंगे।




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