विश्व एड्स दिवस


विश्व में हर साल । दिसंबर को वर्ल्ड एड्स दिवस मनाया जाता है। इसका पूरा नाम 'एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम' है। यह बीमारी HIV (वायरस) की संक्रमण की वजह से फैलती है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है, लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करना और इस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों का हौसला बढ़ाना है। जिससे लोग इस खतरनाक बीमारी को मात दे सकें।


अगर हम इस खतरनाक बीमारी के इतिहास के बारे में बात करें तो 
सबसे पहले 1920 में यह बीमारी अफ्रीका के कॉन्गो की राजधानी किंशासा में फैली। 1959 में कांगो के एक बीमार आदमी के खून के नमूने में सबसे पहले HIV वायरस मिला था। माना जाता है कि वह पहला HIV संक्रमित व्यक्ति था।
भारत में एचआईवी का पहला मामला 1986 में सामने आया। इसके पश्चात यह पूरे देश भर में तेजी से फैल गया एवं जल्द ही इसके 135 और मामले सामने आये जिसमें 14 एड्स 2 के मामले थे। यहाँ एचआईवी/एड्स के ज्यादातर मामले यौनकर्मियों में पाए गए हैं। इस दिशा में सरकार ने पहला कदम यह उठाया कि अलग-अलह जगहों पर जाँच केन्द्रों की स्थापना की गई।

विश्व एड्स दिवस 2023 का थीम एड्स से  प्रभावित समुदायों को नेतृत्व करने देना" है. HIV/AIDS पर UNAIDS ने कहा कि बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके प्रसार को रोकने में समुदायों के महत्व को उजागर करने के लिए विश्व एड्स दिवस 2023 की थीम को चुना गया है.


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