हम बिछड़ रहे थे 😔
जब कभी न मिलने को हम बिछड़ रहे थे
हाथ हाथों में ही था उसके
आंखों से एक-दूजे सवाल कर रहे थे
मुस्कुराहट लबों पे दोनों के थे
भींगी पलकों से एक-दूजे का दीदार कर रहे थे
एक मौसम में कई मौसम जिए थे हमने
फिर भी साथ जीने का वादा बार-बार कर रहे थे
मोहब्बत को मुद्दतों से तरसे थे हमदोनो शायद
इसलिए रब को शुक्रिया अदा हर बार कर रहे थे
बिछड़ने के बाद सारी दुआ बेअसर हो रही थी
खुदा जाने हम कौन-सा गुनाह कर रहे थे
रफ्ता-रफ्ता उसकी यादों को रुकसत कर दिए हमने
उन्हें खो कर हम उन पर जो एहसान कर रहे थे ।



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