"वो स्त्रियाँ कहाँ गईं?"



वो स्त्रियाँ कहाँ गईं

जो पूरे मोहल्ले को

अपना घर मानती थीं?

किसी के दुःख पर

बिना पूछे आँसू बहा देती थीं।


शादी में बिन बुलाए पहुँच जाती थीं,

बस्ती के बच्चों को कहानियाँ सुनाती थीं।

कभी यूँ ही मीठा बनाकर

हर घर में बाँट आती थीं।


बेमतलब के लोगों से भी

मतलब रखती थीं,

क्योंकि उनका दिल…

कभी छोटा नहीं होता था।


शायद वो स्त्री

कहीं खो गई है…

कई शताब्दियों के शोर में।

या फिर हम ही

उसे भूल आए हैं।

                              Pented By :- Ruby Singh

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