"अंधेरा बहुत कुछ छुपा देता है"
बहुत कुछ अपने भीतर समेट लेता है।
चेहरों के असली भाव,
अधूरे वस्त्रों में लिपटा शरीर,
और आँखों से गिरता
दर्द भरा वह आँसू —
सब ओझल हो जाते हैं।
रूखी-सूखी रोटी,
जो दिन के उजाले में
दरिद्रता का दस्तावेज़ बन जाती है,
वही रात के साये में
आभिजात्य लगती है।
और होंठों पर फैली मुस्कान...
जिसे देखकर
जमाना भ्रमित हो जाता है —
कि सब ठीक है।
Pented By: Ruby Singh



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