चेतना का पतन
जीवन क्या है?
प्रकृति द्वारा दिया एक अवसर —
जिसमें इंसान साबित करे
कि वह अन्य जीवों से भिन्न है।
उसकी चेतना,
उसकी बुद्धिमत्ता,
वो औज़ार बन सकते थे —
अपनी इंसानियत को निखारने का।
वो पेड़ों से सीख सकता था परोपकार,
नदियों से — निरंतर बहते रहने की प्रेरणा।
पक्षियों से — खुश रहने की कला,
और पहाड़ों से —
कर्म पथ पर अडिग रहने का साहस।
पर यह क्या?
इंसान की वही चेतना
अब उसे जानवर से भी नीचे गिरा रही है।
वो स्वार्थ की अग्नि में जल रहा है,
प्रकृति पर अत्याचार कर रहा है।
हर जीव डर के साए में जी रहा है —
कि कब वो इंसान का शिकार हो जाए।
Pented By:- Ruby Singh




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