प्रेमिकाएं कभी नहीं मरती


बीत जाते हैं सालों-साल

ज़िम्मेदारियों की गर्द में दबे हुए,
मगर दिल के किसी कोने में
वो एक एहसास…
अब भी साँसें लेता रहता है।

जब पहली बार
कोई हौले से उतरता है दिल की गहराइयों में,
तो सारी दुनिया
एकदम सुनहरी लगने लगती है।
मायूसी जैसे पिघल जाती है,
और आशा बंधती है… एक दूजे से।

मगर—
ज़माना कहाँ समझता है दिलों की ये भाषा?
सामाजिक बंदिशें,
परिवार के ताने,
एक-एक कर तोड़ डालते हैं
इन दो धड़कते दिलों के बंधन।

प्रेम…
वो बस मजबूर रह जाता है।
और प्रेमी–प्रेमिका
बिछड़ जाते हैं।

फिर?
विवाह हो जाता है… किसी अजनबी से।
और जीवन चल पड़ता है
एक नया किरदार निभाने —
जहाँ सिर्फ "कर्तव्य" होते हैं,
"इच्छा" नहीं।

मगर दिल…
वो नहीं भूलता।

उसके किसी एकांत कोने में
ताउम्र बसती रहती है
प्रेमिका की वो मुस्कान,
वो बातें, वो खामोशियाँ।

प्रेमी,
जब अकेला होता है —
तब वह जी भर कर
देखता है उस छवि को,
महसूस करता है वो पल
जो कभी उसके थे।

और तब…
वह महसूस करता है —
कि प्रेमिकाएं कभी नहीं मरतीं,
वो जीवित रहती हैं,
सदैव…
प्रेमी के हृदय में।

                                   By:- Ruby Singh 

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