लानत है
कुछ लोग भूख से तड़पते इंसान को
देखते हैं, पर रोटी नहीं देते।
कहते हैं —
"बिना मेहनत खाना पाप है।"
जैसे भूख ने मेहनत का प्रमाण-पत्र न दिया हो।
कुछ लोग सड़क किनारे
दम तोड़ते जिस्म को पार कर जाते हैं।
कहते हैं —
"कौन फंसे पराई मुसीबत में?"
जैसे इंसान की जान अब अखबार की खबर हो गई हो।
कुछ लोग भिखारी को देखकर
मुंह फेर लेते हैं।
कहते हैं —
"ये तो आदत है इनकी, पेशा है भीख मांगना!"
जैसे पेट की आग कभी उनकी देह तक पहुँची ही नहीं।
कुछ 'बुद्धिजीवी' हैं —
जो अनपढ़ों को शिक्षा से दूर रखना चाहते हैं।
कहते हैं —
"ये हमारे स्तर को नीचे गिरा देंगे।"
जैसे ज्ञान कोई निजी संपत्ति हो, बाँटने से घिस जाए।
कुछ लोग गरीबी को ही
अपराध समझ बैठे हैं।
कहते हैं —
"गरीब अक्सर बेईमान होते हैं।"
जैसे ईमानदारी का ठेका सिर्फ अमीरों ने लिया हो।
इन सब पर एक ही बात कहनी है —
लानत है!
लानत है उन आँखों पर जो देख कर भी अनदेखा करती हैं,
उन हाथों पर जो मदद करने से डरते हैं,
उन दिमागों पर जो सोचते हैं पर महसूस नहीं करते।
लानत है उस सोच पर
जो इंसान होकर भी इंसानियत से कतरा जाती है।
Pented By:- Ruby Singh
.jpg)



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें