आंसुओं की भाषा


आंसुओं की कोई भाषा नहीं होती,

वो सिर्फ़ दर्द की परिभाषा होते हैं।
हर बूँद में छुपा होता है एक अधूरा अफ़साना,
जैसे अबोध शिशु पहचानता है अपनी मां का चेहरा।

लोग अक्सर कहते हैं—
"ये तो खुशी के आंसू हैं!"
पर क्या सचमुच खुशी कभी इतनी नम होती है?

ये आंसू तो उस टूटे हुए पल का हिसाब हैं,
जिसने हमें वर्षों तक मुस्कुराने से रोका।
ये खुशी की नहीं,
उस पीड़ा की अंतिम चीख़ होते हैं
जो अब ख़ामोशी से बह निकलती है।

क्योंकि...
जब दिल बहुत सह लेता है,
और शब्द साथ छोड़ देते हैं—
तब आंसू बोलते हैं।
बिना बोले सब कह जाते हैं।

           Pented By :- Rubi Singh 


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