चर्चा

 **"हाल ही में संत प्रेमानंद और अनुरूढ़ाचार्य द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप पर दिया गया बयान, जिसमें उन्होंने इसे ‘अनैतिक’ और ‘भारतीय संस्कृति के विरुद्ध’ बताया, न सिर्फ व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अपमान है बल्कि भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ भी है।


भारत का संविधान हर वयस्क को अपने साथी के साथ रहने और विवाह या लिव-इन जैसे संबंध को अपनी इच्छा से चुनने का अधिकार देता है (अनुच्छेद 14, 15, 19, 21)।

कानून की नज़र में लिव-इन रिलेशनशिप पूरी तरह मान्य है और इस पर अभद्र टिप्पणी करना, नागरिकों की गरिमा और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।


सवाल ये है — क्या व्यक्तिगत विचारधारा, संविधान और कानून से ऊपर हो सकती है?

हमें तय करना होगा कि हम कानून के साथ खड़े हैं या कट्टरपंथी सोच के साथ।


#RespectConstitution #StopHateSpeech #WomenRights #EqualityForAll"**

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