मैं टूटी थी... मगर 🌺

मैं टूटी थी, मगर झुकी नहीं,
ग़म में थी, मगर रोई नहीं।

नींद में थी, मगर बरसों सोई नहीं,
मोहब्बत में थी, मगर खुद को खोई नहीं।

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