मैं टूटी थी... मगर 🌺
मैं टूटी थी, मगर झुकी नहीं,
ग़म में थी, मगर रोई नहीं।
नींद में थी, मगर बरसों सोई नहीं,
मोहब्बत में थी, मगर खुद को खोई नहीं।
“दर्द-ए-दिल” एक ऐसा ब्लॉग है जहाँ दिल की भावनाएँ, अनकहे जज़्बात और जीवन की संवेदनाएँ शब्दों में बयां की जाती हैं। यहाँ आपको कविताएँ, शायरी, और लघु रचनाएँ मिलेंगी, जो प्रेम, तन्हाई, उम्मीद और जिंदगी की झलक दिखाती हैं। हर पोस्ट आपके दिल को छूने और सोचने पर मजबूर करने वाली होती है।
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