@@@@शायरी@@@@@
ज़िंदगी जब तक है
ख़ुशबू-सा जिया जाए,
टूटे हुए लम्हों को
अब दिल से रिहा किया जाए।
इश्क़ में हम ख़ुद को
कई बार हार चुके हैं,
अब ज़रूरी है कि
अपने आप को फिर से सम्भाला जाए।
“दर्द-ए-दिल” एक ऐसा ब्लॉग है जहाँ दिल की भावनाएँ, अनकहे जज़्बात और जीवन की संवेदनाएँ शब्दों में बयां की जाती हैं। यहाँ आपको कविताएँ, शायरी, और लघु रचनाएँ मिलेंगी, जो प्रेम, तन्हाई, उम्मीद और जिंदगी की झलक दिखाती हैं। हर पोस्ट आपके दिल को छूने और सोचने पर मजबूर करने वाली होती है।
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