एक हम ही तो नहीं टूटे हैं इश्क़ में,  
एक हम ही तो नहीं लुटे हैं इश्क़ में।  
दस्तूर-ए-इश्क़ हर कोई नहीं निभाता,  
आजकल तो हर रिश्ता बस रिस्क बन गया इश्क़ में। 

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