✨ अगर आदमी जानवर होता...
✨ अगर आदमी जानवर होता...
(एक व्यंग्यात्मक कविता)
अगर आदमी जानवर होता,
तो कितनी तस्वीरें बनतीं नई,
हर रूप में, हर चाल में,
छुपी होती कोई कहानी कहीं।
🐶 कुछ होते कुत्ते — वफादार बड़े
मालिक की हर बात पे झुके खड़े।
दफ्तर, फैक्ट्री या घर का कोना,
बस आदेश मिले, और काम होना।
🐴 कुछ होते गधे — खामोश सदा
ढोते रहते बोझ बिना बदला।
न शिकवा करते, न थकते कभी,
समाज, परिवार – सबके लिए जिए।
🐎 कुछ होते घोड़े — बस दौड़ में लगे
पद, प्रतिष्ठा, पैसे में पगे।
ना चैन की सांस, ना ठहराव कहीं,
जीवन बन गया एक दौड़ लंबी सी।
🐘 कुछ होते हाथी — मस्त मिज़ाज
गंभीर, सजीले, चाल में राज।
ना भीड़ की परवाह, ना झूठी होड़,
अपने ही ठाठ में, अलग ही मोड़।
🦊 कुछ होते सियार — चालाक मगर
चेहरे पे नकाब, दिल में डर।
हर मौके पर रंग बदलते,
मतलब निकले, फिर रुख पलटते।
🐂 कुछ होते बैल — दिन-रात जुते
कोल्हू में जीवन, मगर कुछ न कहे।
मेहनत उनकी, मगर नाम किसी का,
आह न निकले, बस कर्म लिखा।
🦁 कुछ होते शेर — निडर, स्वाभिमानी
कर्म में तेज, सोच में ज्ञानी।
जंगल क्या, शहर भी झुके उनके आगे,
राज करते जो खुद के सहारे।
Pented By:- Ruby Singh
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