अधूरी मोहब्बत की शर्त
रूहानी अपनी दुनिया में बहुत सीधी-सादी लड़की थी। उसे किसी दिखावे की ज़रूरत नहीं थी। उसका दिल साफ था, और शायद इसी वजह से वो जल्दी ही दिल दे बैठी थी एक ऐसे लड़के को, जो बिल्कुल उसके उलट था।
वो लड़का—आदित्य—जिद्दी था। अपनी भावनाएँ किसी के सामने ज़ाहिर करना उसे कमजोरी लगता था। कभी हंसकर, कभी चुप रहकर वो रूहानी को उलझन में डाल देता। लेकिन रूहानी को उसकी ख़ामोशी में भी एक अपनापन दिखता था।
रिश्ता आगे बढ़ा, पर आदित्य की दुनिया अलग थी। उसने अचानक से रूहानी से दूरी बना ली। ब्लॉक कर दिया हर जगह से। जब दोबारा उसने संपर्क किया, तो उसने पैसे की शर्त रख दी—“अगर बात करनी है, तो पहले ये मंज़ूर करना होगा।”
ये सुनकर रूहानी का दिल जैसे टूट गया।
उसके मन में सवालों का तूफ़ान था—क्या प्यार भी अब सौदे में तौला जाएगा? क्या रिश्ते की कीमत होती है?
वो रातों को रोती, दिन में मुस्कुराने की कोशिश करती। उसने कई बार सोचा—कॉल करूं या नहीं? कहीं वो हमेशा के लिए चला गया तो? पर एक अजीब-सी आशा भी भीतर थी—शायद एक दिन आदित्य लौट आएगा, शायद उसे अपनी गलती का एहसास होगाl
समय बीतता गया। रूहानी समझने लगी कि असली प्यार वही है जिसमें इज़्ज़त और भरोसा हो। उसने ठान लिया कि वो खुद को इस दर्द से ऊपर उठाएगी। हाँ, उसे आदित्य से मोहब्बत थी, पर उसने अपने दिल से कहा—
"अगर कोई मुझे समझ ही नहीं सका, तो मेरे आँसुओं की कीमत भी उसे क्यों दिखाऊँ?"
रूहानी अब अपने सपनों को पूरा करने निकली। उसके दर्द ने उसे कमजोर नहीं, बल्कि और मज़बूत बना दिया। और आदित्य?
वो अपने अहंकार और शर्तों में ही उलझा रह गया…
कहानी यहाँ ख़त्म नहीं होती—क्योंकि शायद कभी ज़िंदगी उन्हें फिर मिलाए। पर उस दिन तक, रूहानी ने खुद से वादा किया था कि वो अपनी मोहब्बत को अपनी ताक़त बनाएगी, कमजोरी नहीं।
✍️ Ruby Singh
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