तक़दीर के सफ़र में"

कुछ समझदार तो कुछ वफ़ादार मिले,
हमनें जिनसे भी दोस्ती की, इत्तेफ़ाक़ से सब ईमानदार मिले।
चाहा जिनसे दिल से, वो कभी पास न थे,
जिन्हें दिल दिया, वो सभी बेकार मिले।

मुहब्बत शायद मेरे नसीब में लिखी ही नहीं,
हर दुआ अधूरी, हर ख्वाब बेजार मिले।
दर्द बाँटना चाहा तो लोग हँसते रहे,
और जो गले लगे, वो भी बस किरदार मिले।

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