✨ मौन त्याग ✨

 

हर महत्वाकांक्षी पुरुष के पीछे

किसी स्त्री का मौन त्याग होता है।

राम को भगवान बनाने में
अनेक स्त्रियों का समर्पण छिपा है—
माता कौशल्या का आंचल,
सीता का हर कदम पर साथ,
कैकेई का कठोर वचन और
उसके बदले मिला अपमान।

लक्ष्मण आदर्श भाई बने,
पर सुमित्रा की ममता का त्याग
कौन याद करता है?
उर्मिला का प्रेम और धैर्य
किसे दिखाई देता है?

सिद्धार्थ बुद्ध बने,
पर यशोधरा का खोया जीवन,
उनकी पीड़ा, उनका मौन—
कौन सुनता है?
राहुल के दिल में पिता के प्रति
द्वेष न उपजे,
इसके लिए भी एक स्त्री ने
सारा भार उठाया।


इतिहास पुकारता है पुरुषों का नाम,
पर स्त्रियों के बलिदान
चुपचाप रह जाते हैं गुमनाम।

स्त्रियां अपने अस्तित्व को
दांव पर लगा देती हैं
पुरुषों को महत्वाकांक्षी बनाने में—
और खुद खो जाती हैं
गुमनामी की छाया में।

                ✍️Ruby Singh 



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