माँ और पिता


                        माँ और पिता


पुरुष का पिता बनना एक अवसर है,

पर स्त्री का माँ बनना अलौकिक घटना है।


पिता बनने में कुछ ही पल लगते हैं,

पर पिता का फ़र्ज निभाने में

सारी उम्र ढल जाती है।


माँ बनने के लिए एक स्त्री को

असंख्य पीड़ाओं से गुजरना पड़ता है,

तन की वेदना, मन की कसक,

हर धड़कन में नए जीवन का एहसास।


वह अपने लहू से संवारती है अस्तित्व,

अपने सपनों से सींचती है भविष्य।


पिता कंधों पर जिम्मेदारियाँ ढोता है,

पर माँ हृदय में ब्रह्मांड समेटे चलती है।


माँ सिर्फ जन्म नहीं देती—

वह सृष्टि का विस्तार है,

वह धैर्य की प्रतिमा है,

वह जीवन का आधार है।

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