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 **मैंने भागना छोड़ दिया,

स्वामियों के पीछे दौड़ना छोड़ दिया।

भ्रम के साये में जीना छोड़ दिया,

जिंदगी को सत्य की ओर मोड़ दिया।


रिश्तों-नातों की भीड़ से

अपना नाता तोड़ लिया,

क्या अपना, क्या पराया –

सबको अब छोड़ दिया।**


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