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**मैंने भागना छोड़ दिया,
स्वामियों के पीछे दौड़ना छोड़ दिया।
भ्रम के साये में जीना छोड़ दिया,
जिंदगी को सत्य की ओर मोड़ दिया।
रिश्तों-नातों की भीड़ से
अपना नाता तोड़ लिया,
क्या अपना, क्या पराया –
सबको अब छोड़ दिया।**
“दर्द-ए-दिल” एक ऐसा ब्लॉग है जहाँ दिल की भावनाएँ, अनकहे जज़्बात और जीवन की संवेदनाएँ शब्दों में बयां की जाती हैं। यहाँ आपको कविताएँ, शायरी, और लघु रचनाएँ मिलेंगी, जो प्रेम, तन्हाई, उम्मीद और जिंदगी की झलक दिखाती हैं। हर पोस्ट आपके दिल को छूने और सोचने पर मजबूर करने वाली होती है।
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