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मेरे लिखने से क्या, तुम पढ़ो तो कोई बात बने,
शब्द यूँ ही बह जाएँ, ये कैसा सिलसिला?
तुम इन्हें जी लो, तो कोई बात बने।
मैंने हर जज़्बात को काग़ज़ पे उतारा,
सिर्फ लफ्ज़ ना समझो, एहसास करो,
तुम इनमें खुद को पाओ, तो कोई बात बने।
सिर्फ नाम से नहीं, रिश्ता दिल से जुड़ता है,
तुम पास आओ, तो कोई बात बने।
मैंने चाँदनी रातों में तुम्हें पुकारा,
सिर्फ सुनना नहीं, महसूस करना इश्क़ होता है,
तुम दिल में बस जाओ, तो कोई बात बने।
सवाल मेरे हों, जवाब तुम्हारे,
हर ख्वाब मेरा, हर करवट तुम्हारी,
तुम मेरा अक्स बन जाओ, तो कोई बात बने।



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