दिसंबर की तरह.....
तेरे जाने की आहट भी
ठंडी हवा सी लगती है,
दिल के दरवाज़ों पर
खामोशी उतरती है—
दिसंबर की तरह।
यादों का एक झुँड
धीरे-धीरे घूमता है,
धूप भी कम पड़ती है
इन उदास दिनों में—
दिसंबर की तरह।
मैंने जितना रोका तुझे
उतना तू दूर हुआ,
बीच राह में ठहर गया
मेरा हर ख़्वाब—
दिसंबर की तरह।
अब बस मैं हूँ और अकेलापन
जो बात किए बिना भी बोलता है,
वक्त भी थम सा जाता है
इन्हीं टूटे पलों में—
दिसंबर की तरह।



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