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“दर्द-ए-दिल” एक ऐसा ब्लॉग है जहाँ दिल की भावनाएँ, अनकहे जज़्बात और जीवन की संवेदनाएँ शब्दों में बयां की जाती हैं। यहाँ आपको कविताएँ, शायरी, और लघु रचनाएँ मिलेंगी, जो प्रेम, तन्हाई, उम्मीद और जिंदगी की झलक दिखाती हैं। हर पोस्ट आपके दिल को छूने और सोचने पर मजबूर करने वाली होती है।
संदेश
मैंने ख़ुद को वक़्त के हवाले कर दिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैंने ज़माने से हर रिश्ता तोड़ लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैंने ग़म में भी मुस्कुराना सीख लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैं तुझ पर मरना छोड़ चुकी हूँ, अब जो होगा, अच्छा होगा। मैंने दुखों से सौदा कर लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा। मोहब्बत में मरकर जी लिया है, अब जो होगा, अच्छा होगा
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